Importance of Author ऑथर का महत्व, Who are the authors of research? What is a co-author research? What is authorship in research?

Photo by Hannah Olinger on Unsplash
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आप शोध कर रहे हैं, तो ऑथर शब्द जरूर सुने होंगे। शैक्षणिक जगत में ऑथर का बहुत महत्व है। ऑथर का सम्मान भी शैक्षणिक जगत में बहुत है।

क्या आप जानते हैं कि जो सम्मान ऑथर को दिया जाता है इसका कारण क्या है? क्यों शिक्षा जगत की रीड की हड्डी कहा जाता है ऑथर को?

इस ब्लॉग में मैं इसी विषय पर चर्चा करूंगा

शोध के क्षेत्र में रिसर्च पेपर लिखना, शोध पत्र (Article) लिखना, पुस्तक लिखना इत्यादि बहुत तरह के Academic Publication का काम एक ऑथर के जिम्‍में होता है।

ऑथर किसे कहा जाए? ऑथर कौन होता है? ऑथर एक व्यक्ति होता है या एक से अधिक? ये छोटे-छोटे प्रश्न हैं जिन्हें हमें बारीकी से समझना होगा।

ऑथर एक व्यक्ति को भी कह सकते हैं या एक से अधिक व्यक्तियों के समूह को भी ऑथर कहा जाता है। किसी संस्था को भी ऑथर कहा जाता है। विद्यालय या विश्वविद्याल या राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार की कोई मंत्रालय को भी ऑथर कहा जा सकता है। जैसे किसी विश्‍वविद्यालय (University) में परीक्षा का कार्यक्रम परीक्षा विभाग निकालता है तो उस परीक्षा के प्रोग्राम का ऑथर परीक्षा विभाग होगा।

अब प्रश्न यह उठता है कि‍ ऑथर बनने के लिए न्‍युनतम अहर्ता  (Minimum Requirement) क्या है?

जो व्यक्ति जिम्मेवार होता है उसी को ऑथर कहा जाता है। उदाहरण के लिए, एक पुस्तक लिखने में जिस व्यक्ति को जिम्मेवार ठहराया जाता है वह ऑथर है। ऑथर पुस्तक में छपी सभी सामग्रियों की प्रमाणिकता के लिए जिम्मेवार होता है।

या साधारण भाषा में कहें तो  जिस पर जिम्‍मेवारी है, पुस्‍तक में गलत होने पर जो व्‍यक्ति जिम्‍मेवार माना जाता है वहीं ऑथर है। जो लेखक होता है वहीं ऑथर कहलाता है।

अगर वह पुस्तक या कोई वीडियो या लेख या कोई सॉफ्टवेयर या कोई पेंटिंग एक से अधिक व्यक्ति ने मिलकर लिखा है या बनाया है तो वह सभी के सभी उसके ऑथर कहे जाएंगे।

जब पाठक या शोधार्थी किसी पुस्तक से किसी ऑथर की विचार को अपनी रिसर्च पेपर या थीसिस में प्रयोग करते हैं तो उसे विचार के साथ उस ऑथर का नाम, उसके पुस्तक का नाम और पुस्तक छापने के वर्ष का भी जिक्र करना होता है।

ऑथर का महत्व

पुस्तक या रिसर्च पेपर में छापे content और findings की जिम्मेवारी ऑथर पर होती है। ऑथर का विश्वसनीयता एवं प्रसिद्ध उसके द्वारा लिखे Research Paper और पुस्तकों के विश्वसनीयता पर ही टिकी होती है। एक ऑथर जब एक पुस्तक लिखना है और अगर उसके पुस्तक में सभी तथ्य सही हैं, सभी तर्क भी अच्‍छे हैा और संदर्भ के अनुकूल हैं तो पाठक उस ऑथर की लिखी बातों पर विश्वास करते हैं। ऑथर की विश्वसनीयता उसके छपे तथ्य एवं तर्क पर निर्भर करता है। इसीलिए एक ऑथर की जिम्मेवारी होती है कि वह गुणवत्तापूर्ण Research Paper और पुस्तक लिखे।

ज्ञान को आगे बढ़ाने में, शिक्षा के क्षेत्र में विकास करने में, शोध कार्य को और आगे ले जाने में ऑथर का बहुत महत्व होता है। ऑथर किसी समस्या पर नया विचार रखता है। किसी समस्या के जड़ में जाकर उसके कारण की समीक्षा करता है। जब उसे समस्या के कारण का पता चल जाता है तब वह उसके निदान की बात करता है। उसके बारे में सोचता है।

इस प्रकार एक ऑथर सबसे पहले समस्या की पहचान के लिए Research करता है। इसके बाद उसे समस्या के समाधान के लिए पुनः Research करता है। वह देश समाज या अपने शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे चर्चाओं में हिस्सा लेता है सार्थक पहलुओं को आगे बढ़ता है और अपने क्षेत्र के शोधकर्ताओं छात्रों का ज्ञानवर्धन भी करता है। इस प्रकार से वह शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए विचारों को लाकर, समस्याओं को पता लगाकर, समस्याओं का समाधान कर उसका विकास करते रहता है।

एक ऑथर का अपने विषय के क्षेत्र में मान और सम्मान उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करता है। उसकी विद्वता पर निर्भर करता है। उसके ज्ञान की गहराई पर निर्भर करता है। उसके तर्क क्षमता, चिंतन क्षमता पर निर्भर करता है। वह जितनी उच्च गुणवत्ता वाले Research करेगा उसके Research की Quality जितनी अधिक होगी उसका सम्मान उतना ही होगा। शैक्षणिक जगत में उसका उतना ही महत्व रहेगा।

शिक्षा जगत में विभिन्न प्रकार के पद (Posts) जैसे डायरेक्टर, कुलपति, राज्यपाल, विभागाध्यक्ष इत्यादि ऑथर के शैक्षणिक क्षमता, शोध करने की क्षमता के अनुसार दिया जाता है। जो ऑथर शोध करने में जितना माहिर होगा, जितना गुणवत्तापूर्ण शोध करेगा, उसे उतना ही अधिक जिम्मेवारी एवं पद मिलेगी।

कोई ऑथर कितना पुस्तक लिखा है? कितना Research Paper छपवाया है? कितने जगह पर जाकर के Lecture दिया है? कितना workshop करवाया है? कितने project में काम किया है? कितने Book chapters लिखे हैं? इन सभी बिंदुओं के अनुसार ही उसको सम्मान, पदोन्नति एवं जिम्मेवारी दिया जाता है।

शोध क्षेत्र में किसी दूसरे के विचारों को प्रयोग करने की स्वतंत्रता होती है। परंतु इसके साथ एक जिम्मेवारी भी होती है। जब कभी आप किसी दूसरे के विचारों को ज्‍यों का त्‍यों उसी के शब्दों में लिखते हैं, या दूसरे के विचारों को अपने शब्दों में लिखते हैं। तो आपको उस ऑथर का नाम एवं उसके पुस्तक का नाम या Research Paper का नाम उसके साथ जरूर लिखना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो Plagiarism यानी साहित्यिक चोरी का दोषी कहलाते हैं।

What is authorship in research?

किसी किसी Research Project में या पुस्तक लेखन में एक से अधिक ऑथर कार्य करते हैं तो वहां पर उस कार्य में किए गए सहयोग के आधार पर ही ऑथर का वरीयता क्रमांक का निर्धारण किया जाता है। प्रथम क्रमांक पर किसका नाम होगा? द्वितीय क्रमांक पर किसका नाम होगा? तृतीय क्रमांक पर किसका नाम होगा? यह ऑथर के कार्य एवं उसे project में किए गए सहयोग पर निर्भर करता है।

पदोन्नति का सीधा-सीधा संबंध ऑथर के कार्य, गुणवत्तापूर्ण Research Paper की संख्या, पुस्तक की संख्या, Lecture की संख्या, workshop की संख्या इत्यादि पर निर्भर करता है। ऑथर का प्रकाशन का जितना अधिक impact होगा, शैक्षणिक जगत में आपको उतना ही गंभीरता से लिया जाएगा। आपका महत्व उतना ही बढ़ेगा। इसीलिए गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य आपके शैक्षणिक academic career के विकास में एकमात्र सहायक है।

ऑथर नए तथ्य और तर्क के माध्यम से किसी भी चर्चा, विचारधारा, या मत को बदल सकते हैं। Research Methodology में इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है की ऑथर के द्वारा जो तथ्य और तर्क रखे जा रहे हैं उसे कहां से लि‍या गया है? किस प्रकार से प्राप्‍त किया गया है?

इस प्रकार एक ऑथर समाज के नजर में बहुत सम्मानित व्यक्ति होता है। उसकी बहुत बड़ी जिम्मेवारी होती है। उसके सामने दिन प्रतिदिन उत्पन्न हो रहे समस्याओं का समाधान खोजने की भी जिम्मेवारी होती है। समाज विकास करें, देश विकास करें, लोगों का जीवन सुगम हो, सरल हो, सफल हो, इसके लिए ऑथर दिन-रात मेहनत करके लोगों की समस्याओं को समझता है। समस्‍या के कारण को समझता है। इसके बाद समस्या को दूर करने के उपायों पर भी विचार करता है। और उसे दूर करने के उपाय भी अंत में ढूंढ लेता है।  

Pic credit: Photo by Hannah Olinger on Unsplash

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