11 बातें जो एक रिसर्चर को नहीं करनी चाहिए। 11 Don’ts of Researchers ।। What should a researcher need to avoid?

1. समय प्रबंधन को नज़रअन्दाज़ न करें ।। Don’t Neglect Time Management

रिसर्च से संबंधित छोटे से छोटे काम में भी टालमटोल न करें। शोध में कार्य का बंटवारा करना पड़ता है। अध्‍ययन का समय और लेखन का समय भी फिक्‍स करना पड़ता है। इसलिए सभी कामों को समय से करें। कार्य के समय सीमा का विशेष ध्यान रखें। रिसर्च से संबंधित कोई भी कार्य में देरी करने से आपका पूरा रिसर्च कार्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे अनावश्यक टेन्शन बढ़ेगा।

2. साइटेशन गलत न दें।। Don’t Ignore Proper Citation

जब हम किसी दूसरे विद्वान के विचार को किसी रिसर्च पेपर या पुस्तक से अपने रिसर्च पेपर या थीसिस के लिए प्रयोग करते हैं तो उस विद्वान का नाम, पुस्तक का नाम, पृष्ठ संख्या, प्रकाशक का नाम इत्यादि सही-सही लिखना चाहिए। ऐसा करने से आप Plagiarism से बचते हैं। अगर आप ऐसा नहीं करते है, सही-सही साइटेशन नहीं देते हैं, तो Plagiarism के लिए UGC या आपके विश्वविद्यालय में जो नियम है, जो दंड बनाए गए हैं। उसे भुगतना पड़ेगा। आपके थीसिस या रिसर्च पेपर जमा होने में परेशानी हो सकता है या जमा भी नहीं हो सकता है।

3. साहित्य समीक्षा को नजर अंदाज न करें।। Don’t Neglect Literature Review

रिसर्च में लिटरेचर रिव्यू यानी साहित्य समीक्षा का बहुत महत्व है। यही रिसर्च का आधार होता है। लिटरेचर रिव्यू करने के तरीकों का हमें अध्ययन करना चाहिए। सीखना चाहिए और उसी के अनुसार ही लिटरेचर रिव्यू करना चाहिए। यही रिसर्च का बुनियाद (फाउंडेशन) होता है। आप अपने रिसर्च टॉपिक को गहराई से समझाना चाहते हैं। आपके टॉपिक से संबंधित क्या कार्य हुआ है और क्‍या नहीं हुआ यह जानना चाहते हैं, तो इसका सिर्फ एक ही रास्ता है और वह है लिटरेचर रिव्यू। एक छात्रा से विद्वान बनाने का सफर है Literature Review जो जितना अधिक लिटरेचर रिव्यू करेगा वह उतना ही बड़ा विद्वान होगा।

4. नैतिक जिम्मेवारियों को नजर अंदाज न करें।। Don’t Overlook Ethical Considerations

रिसर्च में रिसर्चर को कई प्रकार के नैतिक जिम्मेवारियां निभानी पड़ती हैं। अगर आप वैसे रिसर्च कर रहे हैं जिसमें मनुष्य या अन्य जीवों पर प्रयोग करना है तो उसके लिए कुछ एजेंसियों से अनुमति लेनी पड़ती है। आपके रिसर्च में जो मनुष्य या जीव शामिल हो रहे हैं, उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसके लिए भी कुछ गाइडलाइन होता है। मनुष्य या जीव जंतुओं का मानवाधिकार होता है। उनके प्राइवेसी की रक्षा से संबंधित कुछ नियम होते हैं कुछ गाइडलाइन होते हैं। रिसर्चर को इनका विशेष ध्‍यान रखना पड़ता है। इन जिम्मेवारियों को सफलतापूर्वक निभाएं। इसमें कोई लापरवाही ना करें।

5. सहायता लेने से ना हिचकें।। Don’t Fear Seeking Help

रिसर्च में कई बार हमें दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। कभी-कभी हम ऐसे मोड़ पर खड़े हो जाते हैं जब क्या करें, क्या ना करें, कुछ समझ में नहीं आता है। ऐसी स्थिति में अपने सुपरवाइजर, अपने साथी रिसर्चर से मदद जरूर मांगे। इसमें किसी प्रकार की हिचक ना करें। दूसरे से मदद लेने से, अपनी समस्याओं को दूसरे से बताने से, उनका सजेशन और फीडबैक प्राप्त होता है। यह सजेशन और फीडबैक आपके रिसर्च के क्वालिटी को बढ़ाते हैं।

6. रिसर्च डिजाइन को हल्के में ना लें।। Don’t Skimp on Research Design

आपका रिसर्च का नेचर क्या है? किताबों पर आधारित है या फील्ड वर्क है या इंटरव्यू करने की जरूरत है या लेबोरेटरी में कार्य करने की जरूरत है? सबसे पहले अपने रिसर्च डिजाइन को पहचानें। अगर आपके रिसर्च का डिजाइन Archival है जिसमें रिसर्च पुस्तकों पर आधारित है तो उसी से संबंधित डाटा कलेक्शन मेथड, डाटा एनालिसिस मेथड का प्रयोग करें। इसीलिए रिसर्च डिजाइन को नजर अंदाज करना आपके रिसर्च के गुणवत्ता को बहुत घटिया बना सकता है।

7. डाटा की गुणवत्ता को नजरअंदाज ना करें।।  Don’t Ignore Data Quality

रिसर्च में डाटा कहां से लिया गया है? किस प्रकार से लिया गया है? इसका बहुत महत्व है। इसी से डाटा की गुणवत्ता आंकी जाती है। इसे नजर अंदाज कदापि न करें। आप यह सुनिश्चित करें कि डाटा कलेक्शन का मेथड, डाटा कोडिंग का मेथड और डाटा एनालिसिस का मेथड आपके डिजाइन के अनुरूप हो। डाटा विश्वसनीय जगह से लिया गया हो।

8. फीडबैक को नजर अंदाज न करें।। Don’t Disregard Feedback

रिसर्च के दौरान कहीं से भी अच्छे सुझाव आ रहे हैं। अगर उस पर अमल करने से आपके रिसर्च की गुणवत्ता बढ़ सकती है, तो उसे नजरअंदाज ना करें। उसे खारिज न करें। जो भी ऐसे फीडबैक दे रहा हो, चाहे सुपरवाइजर हो, या साथी रिसर्चर हो तो उसे प्रसन्न मन से स्वीकार करें। Reviewer भी कभी-कभी suggestions देते हैं। Online भी suggestions प्राप्त होता है। सभी suggestions और Feedback पर गंभीरता से विचार करें। और जो अपनाने लायक हो उसे अपनाने में संकोच न करें।  

9. नई जानकारी को आने से न रोकें।। Don’t Neglect Regular Updates

रिसर्च में प्रतिदिन प्रति घंटा प्रति सेकंड कुछ नया होते रहता है। आपके रिसर्च फिल्‍ड में भी ऐसा ही होता है। नई जानकारी आने से अपने आप को वंचित न करें। आपके पास Regular Research Updates आते रहने दें। इसके लिए विभिन्न वेबसाइट, ईमेल का नोटिफिकेशन ऑन करके रखें। कुछ शोध संस्‍थानों का सब्सक्रिप्शन भी लें।

10. त्रुटि रहित की सनक से बचें।। Don’t Succumb to Perfectionism

रिसर्च में त्रुटि न हो इसका ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन एक लाइन 100% Perfect हो तभी दूसरी लाइन लिखेंगे। ऐसी Perfectionism का सनका न पालें। रिसर्च हमेशा नई बातें सीखने की और करने की क्षेत्र है। अपने कार्य पर विश्वास रखें। आपकी जानकारी में अगर आपके थीसीस में, रिसर्च पेपर में कोई त्रुटि है तो उसे सुधार लें। परंतु आपका कार्य में कोई त्रुटि न रहे, एकदम Perfect हो। ऐसा रोग न पालें। ऐसे नकारात्मक विचार से बचें। समय सीमा में रिसर्च को खत्म करने की भी जिम्मेवारी भी निभायें।

11. वर्क-लाइफ बैलेंस को नजरअंदाज ना करें।। Don’t Lose Sight of Work-Life Balance

एक रिसर्चर का एकेडमिक दुनिया के अतिरिक्त पारिवारिक दुनिया भी होता है। वह मनुष्य होता है। वह समाज में रहता है। समाज में रहते हुए उसे कई प्रकार के रिश्ते और जिम्मेवारियों को निभाना पड़ता है। इन सभी रिश्ते और जिम्मेवारियों को रिसर्च के लिए बिल्कुल भेंट न चढ़ा दें। अपने रिसर्च और व्यक्तिगत जीवन के बीच समय का संतुलन बनाए रखें। व्यक्तिगत जीवन में भी समय देने से आपके कार्य की गुणवत्ता और आपके सोचने की क्षमता में बहुत वृद्धि होता है। दिन रात रिसर्च, रिसर्च, रिसर्च करते रहने से हम एक ही दिशा में एक ही लाइन में सोचना शुरू कर देते हैं। कुछ नया नहीं सोच पाते हैं। ऐसा कई शोध में साबित हो चुका है। जब हम कुछ समय व्यक्तिगत जीवन में देते हैं। अपने परिवारजन के बीच ब‍िताते हैं, त्‍योहार साथ में मनाते हैं या मित्र के साथ कहीं घूमने के लिए जाते हैं। तो सोच में नयापन आता है। इससे रिसर्च के समस्याओं को समाधान देने में नया दृष्टिकोण उत्पन्न होता है। इसलिए वर्क-लाइफ बैलेंस को नजरअंदाज कतई न करें।

यह जो बातें यहां बताई गई है, अगर आप इनका पालन करते हैं। ‘‘नहीं करने वाले इन 11 बातों’’ को नहीं करते हैं तो आपके रिसर्च में गुणवत्ता, चिंतन शक्ति बढ़ेगी। नए-नए विचार आते रहेंगे।

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